4 जून-कालाष्टमी व्रत
5 जून-शीतलाष्टमी
6 जून-नवमी
8-अपरा/अचला एकादशी
9 जून-मधुसूदन द्वादशी
10 जून-वट सावित्री व्रत आरंभ। प्रदोष व्रत। शिवरात्रि व्रत।
11 जून-फलहारिनी कालिका पूजा
12 जून-शनिदेव अमावस्या,ज्येष्ट अमावस्या,वटसावित्री अमावस्या,पीपल पूजन,
13 जून-दस दिनक गंगा दशहरा-स्नान प्रारंभ
15-मिथुन संक्रांति तृतीया
16 जून-विनायक चतुर्थी,पंचमी
17 जून-विंध्यवासिनी पूजन,षष्टी
19 जून-दुर्गाष्टमी व्रत,श्रीअन्नपूर्णाष्टमी व्रत
21 जून-निर्जला एकादशी। आचार्य श्रीराम शर्मा के पुण्यतिथि,सौर वर्षाकाल प्रारंभ
23-प्रदोष
24-त्रयोदशी,आद्याशक्ति के महापूजा के विशेष योग
25 जून- पूर्णिमा व्रत। सत्यनारायण पूजा-कथा
26-ज्येष्ट/वटसावित्री/देवस्नान पूर्णिमा
30-गणेश चतुर्थी
Friday, June 04, 2010
Thursday, June 03, 2010
बिहार-दिल्ली समर स्पेशल
गरमी छुट्टी के दौरान भीड़ के देखैत रेल प्रशासन नई दिल्ली के वास्ते तीन-तीन ट्रेन चला रहल अचि। मंगल , ब्रैस्पति आ शनिकए दरभंगा आ पटना सं तथा बरौनी सं ब्रैस्पति कए आनंद विहार के लेल ट्रेन चलत। गाड़ी संख्या 0415 पटना आनंद विहार सप्ताह में तीन दिन पटना जंक्शन सं दुपहर 12.55 बजे चलिकए दानापुर, आरा, बक्सर, मुगलसराय, वाराणसी, सुलतानपुर, लखनऊ, बरैली, मुरादाबाद होइत अगिला दिन भोरे 9.15 बजे आनंद विहार पहुंचत। ई ट्रेन एक जुलाई तक चलत। घुरैत काल ई आनंद विहार सं 16.30 बजे चलत आर 11.15 बजे पटना जंक्शन पहुंचत। तहिना, गाड़ी संख्या 0423 दरभंगा-आनंद विहार टर्मिनल स्पेशल सप्ताह में तीन दिन दरभंगा सं भोरे 6.15 बजे चलिकए समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सोनपुर, छपरा होइत अगिला दिन दुपहर 12.35 बजे आनंद विहार टर्मिनल पहुंचत। एहि ट्रेन में स्लीपर के 6, जेनरल के 12, एसएलआर के दू डिब्बा समेत कुल 20 डिब्बा रहत। गाड़ी संख्या 0581 बरौनी-आनंद विहार साप्ताहिक ट्रेन प्रत्येक ब्रैस्पति कए बरौनी सं चलिकए शाहपुर पटोरी, हाजीपुर, छपरा, बलिया, गाजीपुर सिटी, वाराणसी, लखनऊ, मुरादाबाद, गाजियाबाद होइत अगिला दिन 11.55 बजे आनंद विहार पहुंचत। वापसी में, ई साझ मे 5 बजे आनंद विहार सं चलिकए दोसर दिन 3.45 बजे बरौनी पहुंचत।Tuesday, June 01, 2010
मान रहे तेरा.....................पिता
सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन पर आइ सं मान रहे तेरा...........पिता धारावाहिक क रहल अछि। छत्तीसगढ़ के ब्रह्मपुर कोयला खान के पृष्ठभूमि पर आधारित एहि धारावाहिक में अनमोल नामक युवती के कहानी छैक जे अपन बाबूजी दुर्गाप्रसाद के संरक्षण दैत छैक आ हुनकर प्रतिष्ठा बहाल करैत छैक। दुर्गाप्रसाद के जीवन मे एक्कहि टा सेहंता छन्हि जे कोयला खदान मे काम बन्द हुअए ताकि ब्रह्मपुर के विनाश सं बचाओल जा सकए।धारावाहिक मे,अनमोल के माए के,कोयला खान दुर्घटना मे स्वर्गवास भ जाइत छैक। अनमोल कें अपन बाबूजी के संरक्षण देबाक लेल लगातार संघर्ष करए पड़ैत छैक किएक तं शहर के लोक सभ हुनका पागल बुझए लागल छन्हि। लोक सभ दुर्गाप्रसाद के चेतावनी पर ध्यान नहि दैत छैक।
अनमोल के चच्चा कालीप्रसाद विधायक छथि। ओ बड्ड लोकप्रिय आ प्रभावशाली व्यक्ति छथि आ अनमोल कें अपन बेटी जकां मानैत छथिन्ह,यद्यपि आन गोटे सभ अनमोल कें उपेक्षित भाव सं देखैत छथि।
धारावाहिक कें प्रसारण प्रति सप्ताह सोम सं ब्रैस्पति तक राति आठ बजे सं हएत।Monday, May 31, 2010
बात हमारी पक्की है
सोनी टीवी पर आई सं नव धारावाहिक बात हमारी पक्की है शुरु भ रहल अछि। एहि धारावाहिक में राजस्थान के माउंट आबू मे रहि रहल साची के कहानी छैक जे अनाथ छल आ जकर पालन-पोषण ओकर मामा-मामी करैत छैक। ओकर विवाह कतेको जगह ठीक भ जएबाक विश्वास होइत छैक मुदा कोनहु ने कोनहु कारणे विवाह नहि भ पबैत छैक। तें, सांची के विवाह ओकर मामी के लेल एकसूत्री कार्यक्रम भ जाइत छैक। जत्तेक बेर वरपक्षक लोक देखए लेल अबैत छथि,सांची के सजाओल गुड़िया जकां देखाओल जाइत छैक आ बात नहि बनला पर सांचिए पर दोषारोपण कएल जाइत छैक। वरपक्ष सं बेर-बेर नकारात्मक उत्तर पाबि सांची बेइज्जत महसूस करए लगैत अछि परञ्च एक दिन आभूषण व्यापारी के पुत्र श्रवण सं ओकर भेंट होइत छैक। श्रवण दिग्भ्रमित आ गैर-ज़िम्मेदार टाइप आदमी छैक। ओकर परिवार के विश्वास छैक जे विवाहक बादे श्रवण ठीक रस्ता पर आओत। दुनू के विवाह तय भ जाइत छैक। जल्दिए सांची के पता चलि जाइत छैक जे श्रवण तं वास्तव मे आओर ककरो सं प्रेम करैत छथि। दरअसल श्रवण अपन भाउज के प्रति आसक्त रहैत छैक। आखिरकार की होइत छैक सांची आ श्रवण के जीवन मे,इएह एहि सीरियल मे देखाओल गेल छैक। धारावाहिक के प्रसारण प्रति सप्ताह सोम सं ब्रैस्पति तक राति साढे आठ बजे सं हएत।नव वेरायटी के हरदि
अहमदाबाद के नवसारी कृषि विश्वविद्यालय के एक नव प्रकारक हरदि विकसित करबा मे सफलता भेटल अछि। कहल जा रहल छैकक जे एहि हरदि मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बेसी छैक आ उत्पादन सेहो बेसी होइत छैक। एकर नाम एनएयू टरमरिक-1 राखल गेल अछि। एकर विकास भेल छैक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पी एस वाशी के निर्देशन में । प्रो. वाशी एहि पर पछिला छओ बरख सं अनुसंधानरत छलाह। दावा कएल जा रहल छैक जे एहि वेरायटी के हरदि के उत्पादन 35-40 टन प्रति हेक्टेयर रहत जबकि पारंपरिक सुगंधम किस्म के उत्पादन 15-20 टन प्रति हेक्टेयर रहैत छैक।
"शोले" के कालिया के सरकारी मकान
महाराष्ट्र सरकार के हाउसिंग बोर्ड जाहि 15 लोकनि कें फ्लैट आवंटित कएने अछि ताहि मे 'शोले' के कालिया अर्थात् वीजू खोटे सेहो शामिल छथि। सत्तर के दशक के जबरदस्त हिट फिल्म 'शोले' में कालिया के किरदार अभिनेता वीजू खोटे कएने छलाह। ज्ञातव्य जे वीजू खोटे तीन सए सं बेसी फिल्मों आ टीवी सीरियल मे काज क चुकल छथि। ओ अभिनेत्री शोभा खोटे के जुड़वा भाए छथि। मुख्यमंत्री अशोक चौहान वीजू खोटे समेत मराठी सिनेमा सं जुड़ल आनो लोकनि कें नबका घरक चाभी देलनि। मकान पओनिहार मे खोटे के अलावा आओर चौदह लोक छथि। प्रसिद्ध मराठी अभिनेता प्रभाकर पनशिकर महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलवमेंट अथॉरिटी (एमएचएडीए) द्वारा मराठी कलाकारलोकनि कें घर देबाक निर्णय के वास्ते मुख्यमंत्री के तारीफ कएने छथि।Tuesday, May 25, 2010
मैथिली गायिकी के क्रेज बढि रहल अछिःअंजू झा
मैथिली गीत में अंजना आर्या उर्फ अंजू झा के खास पहचान छन्हि। अँजू झा विद्यापति स्मारक समिति के तत्वावधान में आयोजित जानकी नवमी महोत्सव में हिस्सा लेबाक लेल रांची आएल छलीह। हुनकर कहब छन्हि कि मैथिली गायकी के क्रेज बड्ड बढि गेल छैक आ एकर सुननिहारक संख्या सेहो बढ़ल छैक। मैथिली एलबम सेहो खूब बिका रहल अछि। ई स्थिति दरभंगा वा मधुबनी धरि सीमित नहि छैक अपितु दिल्लीयो में लोग एकरा हाथों-हाथ ल रहल छथि। अंजू जी मैथिली में मारिते गीत गओने छथि। रेडियो स्टेशन सं ल कए सौभाग्य मिथिला चैनल के टाइटल सांग तक हुनके गाओल छन्हि। ओ मैथिली में तं गबिते छथि, भगवती जागरण,हिंदी, भजन, भोजपुरी, अंगिका, तमिल सहित आनो कतेक भाषा में लोक गीत गाबि चुकल छथि। आब नै पहिरब सलवार यौ, हमरा साड़ी मंगा दिय, साया मंगा दिय...., बुढ़वा मांगै छथि करैला के चोखा.. , घुंघटा उठा दिय नै सजना के अतिरिक्तो कतेको चर्चित लोकगीत हुनके गाओलल छन्हि। हुनकर एलबम मिस कॉल बड़ लोकप्रिय भेल अछि। टी-सीरीज में चिहुन के पापा नाम सं नव एलबम अबएवला छन्हि।अंजू जी हमार टीवी, महुआ टीवी व सौभाग्य मिथिला के साथ ऑल इंडिया रेडियो,दिल्ली में नियमित लोकगीत गबैत छथि । हुनकर विचार छन्हि जे गायिकी के क्षेत्र में कलाकार के आब खूब सम्मान भेट रहल छैक आ आब लोक एकरा कैरियर के रूप में अपना सकैत अछि। प्रभात खबरि सं बातचीत में ओ कहलनि कि जतए कतहु स्टेज शो के मौका भेटए, अपनी गायिकी के पूरा तैयारी के साथ पेश कर,एही सं अहां कें एक अलग पहचान भेटत आ अपना आप में आत्मविश्वास सेहो पैदा हएत। हुनकर दृढ़ विश्वास छन्हि जे जं अहांक भीतर प्रतिभा अछि आ अहां पर्याप्त मेहनति करैत छी तं अहां कें गायकी आ कला के केओ नहि दबा सकैत अछि। अंजू झा जी रेडियो धूम के कार्यक्रम में सेहो शामिल भेलीह(प्रभात खबर,रांची,25 मई,2010)
Monday, May 24, 2010
मिथिलाक्षर कें बिसरि गेल मिथिला
पहिरन-ओढन आ भोजन संगहि जं कोनो चीज कोनहु क्षेत्रक परिचायक होइत छैक तं ओ छैक- भाषा। भाषा सहजहिं बोध करबैछ जे व्यक्ति कोन ठामक अछि। भाषा अपन लिखित रूप में ई सामर्थ्य लिपि के माध्यम सं प्राप्त करैछ। एहन भाषा सबहक संख्यो बेसी नहि छैक जकर अपन स्वतंत्र लिपि हुअए। एहि मामिला में मैथिली सौभाग्यशाली अछि जकर अपन स्वतंत्र लिपि छैक। एकरा कहियो वैदेही लिपि कहल गेलैक तं कहियो तिरहुता। वर्तमान में ई मिथिलाक्षर कहाइछ। मुदा एकर जननिहार कतेक गोटे छथि? चाहे विश्वविद्यालय आ कालेज के प्राध्यापक होथि आकि स्कूल के शिक्षक, मैथिली के छात्र होथि आकि गवेषक या फेर आमजन, गिन-गुथल लोक कें मिथिलाक्षर लिखए-पढ़ए अबैत छन्हि। एतबे नहि, मैथिली के छात्र कें परीक्षा में देवाक्षर सं मिथिलाक्षर लिखए लेल कहल जाइत छन्हि मुदा एकर कक्षा शायदे कत्तहु होइत अछि। छात्र या तं कत्तहु सं जोगाड़ कए एकरा लिखैत छथि अथवा 10 या 5 नंबर के एहि प्रश्न कें छोड़िए देब उचित बुझैत छथि। उत्तर पुस्तिका जंचनिहारो एक्कहि-दू गोटे के मिथिलाक्षर अबैत रहैत छन्हि। कहियो एहि ठामक लोग मिथिलाक्षर के एतेक अभ्यस्त रहथि कि प्रायः सभ ग्रंथक लिपि मिथिलाक्षर रहैत छल,चाहे विषय किछु रहए। एतेक धरि जे संस्कृत के हजारों पांडुलिपि आईयो स्थानीय मिथिला शोध संस्थान आ कामेश्र्वर सिंह दरभंगा के पुस्तकालय सहित आन जगह पर धएल अछि, जे मिथिलाक्षर में अछि। मानल जाइत अछि कि करीब सौ-सवा सौ साल पहिने मिथिला मे मिथिलाक्षर सं मोहभंग भए देवनागरी लिपि के प्रति रूझान बढब प्रारम्भ भ गेल छल। तइयो,कहुना-कहुना कए मिथिलाक्षर जीवित रहल। लेखन में उपयोग चाहे बन्न भ गेल हुअए, मुदा अक्षरारंभ में सात-आठ दशक पूर्व धरि एकर अस्तित्व छल। नेना सभ कें मिथिलाक्षरे मे आंजी सिद्धिरस्तु लिखवाकए पढ़ाई शुरू कराओल जाइत छल। क्रमशः,ई परंपरा समाप्त भ गेल आर एकर अस्तित्व मुंडन, उपनयन, विवाह, श्राद्ध आदि पर देयादबादक कें न्योतए लेल लिखल जाएवला पाता (पते) पर रहि गेल। करीब दू दशक पूर्व तक ई परंपरा कायम छल। जहिया सं छपल कार्ड देबाक प्रचलन बढ़ल, पाताक संगहि मिथिलाक्षर सेहो गायब भ गेल। ई आब तेना बिसरा गेल अछि कि दरभंगा जंक्शन पर जखन स्टेशन केर नाम मिथिलाक्षर में अंकित कराओल गेल तं कतेको लोकनि आश्चर्य भाव सं पूछैत देखल गेलाह कि स्टेशनक नाम बंगला में किएक लिखल गेल छैक? ब्राह्मी लिपि सं बहराएल मिथिलाक्षर व बंगला में साम्य सं एहन भ्रम उत्पन्न होइत छैक मुदा दुनू के बीच पर्याप्त अंतर सेहो छैक, जो कम से कम मैथिललोकनिक लेल तं आश्चर्यक गप्प नहिए अछि। मिथिलाक्षरक प्रचलन घटला पर चिंता व्यक्त कएल जाइत छैक। एकर विकासक लेल अतीत में प्रयास सेहो भेल छल। मिथिलाक्षरांकण प्रबंधक समिति,लहेरियासराय 1936 के आसपास प्रेस के कांटा बनओने छल। इलाहाबाद सं, मैथिली के प्रथम इतिहासकार डा. जयकांत मिश्र मिथिलाक्षर सिखएबाक पुस्तिका छपओने छलाह। अखिल भारतीय मैथिली साहित्य परिषद,दरभंगा सेहो मिथिलाक्षर अभ्यास पुस्तिका प्रकाशित कएने छल। कतेको बेर, मिथिलाक्षर सिखएबाक अभियान सेहो चलल,परञ्च मिशन इंपॉसिबल बनल रहल। जगत जननी जानकी कें एक नाम मैथिली सेहो रहनि आ प्रति वर्ष जानकी नवमी पर कतेको संस्था सभ मैथिली दिवस मनबैत अछि। मैथिली के विकासक संकल्प लेल जाइत अछि मुदा मिथिलाक्षर अचर्चित रहि जाइत अछि। एकर विकासक लेल ने कोनो योजना बनैत अछि आ ने कोनो ठोस प्रयास कएल जाइत अछि।(अमलेंदु शेखर पाठक,दैनिक जागरण,पटना,22.5.2010)
Wednesday, May 19, 2010
संस्कृति एक्सप्रेस महोत्सव शुरू

भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता गुरूदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर के 150म जन्मवार्षिकी के अवसर पर भारतीय रेल के विशेष प्रदर्शनी गाड़ी संस्कृति-यात्रा एक्सप्रेस पटना पहुंच गेल अछि। आइ सं शनि धरि पटना जंक्शन के प्लेटफार्म नौ पर ई ट्रेन ठाढ रहत। प्रदर्शनी भोरे आठ बजे सं सांझ आठ बजे तक खुजल रहत। ई प्रदर्शनी गाड़ी भारतीय रेल के विशिष्ट प्रयासक नतीजा छैक। एहि गाड़ी में विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन आर हुनकर रचना सभ देया विस्तार सं जानकारी देल गेल छैक। प्रदर्शनी पांच डिब्बा मे छैक। प्रथम कोच में जीवन स्मृति के झांकी देखाओल गेल छैक। दोसर कोच में हुनकर कृति के आधार पर गीतांजलि राखल गेल छैक। एही रचना पर हुनका नोबल पुरस्कार भेटल छलन्हि। एहि कोच में गुरुदेव कें कविता, संगीत आर हुनका द्वारा लिखल गेल चिट्ठी सभहक अंश उद्धृत कएल गेल अछि। तेसर कोच के नाम मुक्तधारा राखल गेल छैक।
अमरनाथ यात्रा मोबाइल संग

अमरनाथ यात्रा 1 जुलाई सं शुरु भ रहल अछि। जं अहां अमरनाथ यात्ना पर जा रहल छी तं आब घर-परिवार सं फोन सम्पर्क सं कटल नहि रहब। पवित्न गुफा धरि कत्तहु सं बीएसएनएल के मोबाइल सेवा सं आब बात क सकब।
संचार आ सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमत्नी सचिन पायलट के प्रयास सं, पहलगाम आ बालटाल सं अमरनाथ गुफा तक जाएवला दूनू रस्ता पर बीएसएनएल नौ टा टावर लगा रहल अछि जाहि सं श्रद्धालुलोकनि कें नियमित रुप सं मोबाइल सिग्नल भेटतनि। कश्मीर घाटी में 13500 फुट के ऊंचाई पर स्थित पवित्न गुफा के दर्शन करए प्रति वर्ष करीब चारि लाख लोक जाइत छथि।
ई टावर सभ 30 जून तक काज करए लागत। तें,आब घर सं निकललो पर ककरो कोनो तरहक चिंता नहि रहतनि। स्थानीय निवासी, प्रशासनकर्मी आ सुरक्षा बल के जवान के सेहो एकर फायदा भेटतैक आ ओ सभ आपस मे गपिया सकताह आ यात्रीलोकनि सं सम्पर्क राखि सकताह।
ज्ञातव्य जे नौ मे सं चारि टा टावर सड़क मार्ग पर आ शेष पांच पैदल मार्ग पर लगाओल जा रहल छैक।
पटना सं भारत दर्शन

भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन लिमिटेड(आईआरसीटीसी) पर्यटक सभ कें कम खर्च मे भारत दर्शन कराओत। योजनांतर्गत देश के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल सभहक लेल पटना सं 6 जून कए एक विशेष ट्रेन चलाओल जाएत। आईआरसीटीसी के क्षेत्रीय प्रभारी प्रवीण कुमार कें कहब छन्हि जे 6 जून कए पटना जंक्शन सं विशेष ट्रेन भारत दर्शन के लिए खुजत जे केदारनाथ, बद्रीनाथ, देव प्रयाग, हरिद्वार, ऋषिकेश, गौरी कुंड, कर्ण प्रयाग, विष्णु प्रयाग, रुद्र प्रयाग आर नंद प्रयाग कें दर्शन कराओत। एकर माध्यम सं दिन के यात्रा मे ठहरबाक आ घुमबाक विशेष व्यवस्था कएल गेल छैक। पर्यटक लोकनि कें एहि वास्ते मात्र 6155 रुपय्या जमा कराबए पड़तनि।
Tuesday, May 18, 2010
एकजुटता सं बदलत कायस्थ समाजक तस्वीर

देश भरि मे दस करोड़ के संख्याबल आ बुद्धिजीवी वर्ग में अलग पहचान रहितो, कायस्थ समाज राजनीतिक उपेक्षा के दंश झेल रहल अछि। एकर सभ सं पैघ कारण छैक- समाज में एकजुटता के अभाव। समाज में जं एकजुटता भ जाए,तखने ई परिदृश्य बदैल सकैत अछि। ई विचार उत्तरप्रदेश में कायस्थ चेतना रथ यात्रा के प्रांतीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि मथुरा के विधायक प्रदीप माथुर व्यक्त कएलनि। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा रविकए कानपुर रोड स्थित सीएमएस प्रेक्षागृह में सम्मेलन आयोजित कएल गेल छल। महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ए.के. श्रीवास्तव के नेतृत्व में भेल स्वागत समारोह मे, अपर महान्यायवादी डा.अशोक निगम, विधायक सुरेश कुमार श्रीवास्तव, महासभा के प्रदेश महामंत्री डा. रमेश चंद्र श्रीवास्तव सहित कायस्थ समाज के सैकड़ो लोक शामिल छलाह। डा. रमेश चंद्र श्रीवास्तव कहलनि जे 18 अप्रैल कए सिद्धार्थनगर सं चलल यात्रा करीब 49 जिला सं होइत शनिकए लखनऊ पहुंचल। यात्रा के दौरान कायस्थ समाज मे राजनैतिक चेतना जागृत करबाक लेल, आर्थिक आधार पर आरक्षण के वास्ते जन जागरण करबा पर, कन्या भ्रूण हत्या रोकबा पर, दहेज रहित विवाहक लेल लोक कें जागृत करबा पर आर युवकलोकनि कें स्वरोजगार हेतु प्रेरित करबा पर ज़ोर देल गेलैक आ कतेको सामाजिक सरोकार देया जागरुक बनएबाक लेल प्रचार-प्रसार कएल गेल। सम्मेलन में कायस्थ समाज की वेबसाइट देया सेहो विस्तार सं बताओल गेल।
Subscribe to:
Posts (Atom)


